पत्रिका गेस्ट राइटर – डॉ. पिंकी टोपीवाला(फिजियोथेरेपिस्ट)
फिजियोथेरेपी जिसे भौतिक चिकित्सा के रूप में माना जाता है। शारीरिक दुर्बलताओं, अश्कों और निदान के उपचार और रोकथाम पर केंद्रित है।यह चिकित्सा जगत की ऐसी विधा है,जिसे खुद को मजबूत बनाते हुए अपने आप को हर क्षेत्र में हस्तक्षेप के काबिल बनाया है। फिजियोथैरेपी आधुनिक युग में होने वाले रोजमर्रा की परेशानियों से छुटकारा दिलाने की जंग है और न केवल साधारण मांसपेशियों का दर्द बल्कि कई ऐसी जटिल बीमारियां होती है, जिनका इलाज केवल फिजियोथैरेपी है। इस विधा में नए-नए आयाम स्थापित किए गए हैं। जैसे-जैसे विज्ञान ने तरक्की की है इस फील्ड में वैसे-वैसे नए प्रयोग एवं तकनीक का उपयोग करके मरीजों को आराम दिलाया जाता रहा है। विश्वास एवं प्रयास की कहानी है फिजियोथैरेपी: आज के युग में फिजियोथेरेपी किसी परिचय की मोहताज नहीं है चिकित्सा जगत का हर विभाग इसे मानता है। कुछ ही वर्षों में जैसे-जैसे हम लोग सुविधाओं एवं कामगतिशील रूटिंग के आदि हो चुके हैं। हमारे बैठने उठने के गलत तरीकों के आदि हो चुके हैं। हमें फिजियोथैरेपी की अत्यधिक आवश्यकता पड़ने लगी है।जैसे-जैसे हमारी दिनचर्या सिर्फ टेबल कुर्सी पर बाधित होने लगी है,हमारी बोनशिल्ता में कमी आई है।और अनेको तकलीफ भी शुरू हुई है। उन सबके लिए किसी की आवश्यकता होती है तो वह है फिजियोथेरेपी। यही फिजियोथेरेपी के मूल मंत्र है। एक व्हीलचेयर पर बाधित व्यक्ति को चलना सिखाना,एक बच्चा जो अभी संभल भी नहीं पाता है उसे धीरे-धीरे प्रयास करके चलना सिखाया। बेशक अथक प्रयास एवं अटूट विश्वास का नतीजा है कि वह बच्चे को चलने दौड़ने में सक्षम बनाता है। एक फिजियोथेरेपिस्ट न केवल किसी के दर्द से मुक्ति दिलाता है बल्कि टूटे विश्वास को संभाल भी देता है। फिजियोथेरेपिस्ट शारीरिक,मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक दृष्टि से लोगों को उनके जीवन की गुणवत्ता को अधिकतम करने में मदद करते हैं।फिजियोथेरेपी एक तरह का चिकित्सीय उपचार है, जो सर्जरी के पश्चात कई तरह की रिकवरी के साथ शरीर की जकड़न को दूर कर सकती है। इसके अलावा फिजियोथेरेपी से भी शरीर की जकड़न और दर्द को कम किया जा सकता है। फिजियोथेरेपी एक तरह से मेडिकल साइंस का ही एक हिस्सा है। इसमें इलाज के कई तरीके होते हैं, जिसमें हाथों की कसरत,एक्सरसाइज, पेन से रिलीफ मूवमेंट के दर्द को दूर करने में मदद मिलती है। देखा जाए तो फिजियोथेरेपी का मुख्य उद्देश्य शरीर के रोगों को जानकार रोगी को उससे मुक्ति दिलानी है। फिजियोथेरेपी के अनेक प्रकार हैं, जिसमें एक्सरसाइज, हीट थेरेपी, कोल्ड थेरेपी, इलेक्ट्रोथेरेपी,स्पोर्ट्स थेरेपी, वुमन हेल्थ थेरेपी,कार्डियोवैस्कुलर फिजियोथेरेपी,न्यूरोमस्कुलोस्केलेटलफिजियोथेरेपी, आर्थोपेडिक फिजियोथेरेपी, आर्थोपेडिक,फिजियोथेरेपी और बाल चिकित्सा फिजियोथेरेपी आदि शामिल हैं।उच्च गुणवत्ता वाली फिजियोथेरेपी विभिन्न प्रकार की स्थितियों के उपचार में सहायता कर सकती है,जिनमें संयुक्त विकार, हृदय संबंधी समस्याएं और तंत्रिका संबंधी स्थितियां जैसे रीढ़ की हड्डी की चोटें,स्ट्रोक, पार्किंसंस, एमएस आदि शामिल हैं। आधुनिक जीवनशैली में शारीरक गतिशीलता में कमी आने के कारण मनुष्य अनेक बीमारियों का शिकार होता जा रहा है। स्वस्थ रहकर अपने कार्यक्षेत्र में अधिकतम कार्य निष्पादन करने और शीर्ष पदों तक पहुंचने के लिए फिजियोथेरेपी की महती भूमिका है।

